भारतीय टीम के पूर्व सहायक कोच की नाइट राइडर्स में वापसी, मिला क्रिकेट रणनीति का सबसे बड़ा पद
नीदरलैंड के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सहायक कोच रयान टेन डोशेट एक बार फिर नाइट राइडर्स परिवार में लौट आए हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उन्हें फ्रेंचाइजी का 'हेड ऑफ…
नीदरलैंड के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सहायक कोच रयान टेन डोशेट एक बार फिर नाइट राइडर्स परिवार में लौट आए हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उन्हें फ्रेंचाइजी का 'हेड ऑफ क्रिकेट स्ट्रैटेजी' नियुक्त किया गया है, जो एक बेहद अहम जिम्मेदारी है।
इस नई भूमिका में टेन डोशेट नाइट राइडर्स समूह की सभी टीमों के लिए भविष्य की योजनाएं तैयार करेंगे। उनकी जिम्मेदारियों में खिलाड़ियों की खोज (स्काउटिंग), टीम चयन की रणनीति बनाना, स्क्वाड की योजना तैयार करना और खिलाड़ियों के प्रदर्शन का आकलन करना शामिल होगा। वह कोचिंग स्टाफ के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि समूह की सभी टीमों में क्रिकेट को लेकर एक जैसी सोच और योजना लागू हो।
कई टीमों में सहायक कोच की भूमिका भी
'हेड ऑफ क्रिकेट स्ट्रैटेजी' के पद के साथ-साथ टेन डोशेट दुनिया भर की टी20 लीगों में नाइट राइडर्स की टीमों के सहायक कोच की भूमिका भी निभाएंगे। इनमें कैरेबियन प्रीमियर लीग (CPL) में ट्रिनबागो नाइट राइडर्स, यूएई की इंटरनेशनल लीग टी20 (ILT20) में अबू धाबी नाइट राइडर्स और मेजर लीग क्रिकेट (MCL) में लॉस एंजिल्स नाइट राइडर्स शामिल हैं।
नाइट राइडर्स से पुराना नाता
टेन डोशेट का नाइट राइडर्स के साथ रिश्ता एक दशक से भी ज्यादा पुराना है। वह 2011 में एक खिलाड़ी के तौर पर कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) से जुड़े थे और 2012 तथा 2014 में IPL खिताब जीतने वाली टीम का हिस्सा भी रहे। बाद में, 2022 में वह फ्रेंचाइजी के कोचिंग स्टाफ से जुड़े और 2024 में KKR के तीसरे IPL खिताब के दौरान भी सपोर्ट स्टाफ का हिस्सा थे। नाइट राइडर्स के CEO वेंकी मैसूर ने उनकी वापसी पर खुशी जताते हुए कहा कि टेन डोशेट को फ्रेंचाइजी की सोच की गहरी समझ है और उनका अनुभव भविष्य में काफी मददगार साबित होगा।
भारतीय टीम के साथ कार्यकाल
हाल ही में टेन डोशेट भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर के सपोर्ट स्टाफ में सहायक कोच थे। उनके कार्यकाल में टीम ने T20 विश्व कप 2024, चैंपियंस ट्रॉफी 2025 और T20 विश्व कप 2026 जीता। हालांकि, टेस्ट टीम को इस दौरान न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया से हार का सामना करना पड़ा। उनका अनुबंध जून में समाप्त हो गया था, लेकिन वह इंग्लैंड के खिलाफ व्हाइट-बॉल सीरीज तक टीम के साथ रहे। परिवार से दूर लंबी यात्राओं को उनके भारतीय टीम से अलग होने का एक मुख्य कारण माना जा रहा है।
इनपुट: IANS


