रविवार, 30 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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एशियन गेम्स 2026: 13 की उम्र में लोकल ट्रेन से शुरू हुआ सुरुचि सिंह का सफर, अब भारत के लिए लगाएंगी निशाना

कभी अपने पिता और भाइयों के साथ लोकल ट्रेन से शूटिंग अकादमी तक का सफर करने वाली 13 साल की सुरुचि इंदर सिंह फोगाट आज 20 साल की उम्र में भारत की एक प्रमुख पदक उम्मीद बन चुकी हैं। सात साल के संघर्ष और…

एशियन गेम्स 2026: 13 की उम्र में लोकल ट्रेन से शुरू हुआ सुरुचि सिंह का सफर, अब भारत के लिए लगाएंगी निशाना
(फोटो: IANS)

कभी अपने पिता और भाइयों के साथ लोकल ट्रेन से शूटिंग अकादमी तक का सफर करने वाली 13 साल की सुरुचि इंदर सिंह फोगाट आज 20 साल की उम्र में भारत की एक प्रमुख पदक उम्मीद बन चुकी हैं। सात साल के संघर्ष और मेहनत के बाद अब वह आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स 2026 में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। सुरुचि का कहना है कि भारतीय जर्सी पहनना उनके लिए एक गर्व का क्षण है, जो उनके तय किए लंबे सफर को दर्शाता है।

समाचार एजेंसी IANS के साथ बातचीत में सुरुचि ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि जब उन्होंने शुरुआत की थी, तब उन्हें कोई नहीं जानता था। लेकिन शूटिंग ने उन्हें अपनी पहचान बनाने का मौका दिया। उन्होंने कहा, "मैं सच में शुक्रगुजार हूं कि मैं शूटिंग में आई। अगर मैंने कोई और खेल चुना होता, खासकर कोई टीम गेम, तो शायद मैं यहां तक नहीं पहुंच पाती।"

मानसिक मजबूती ही असली चुनौती

सुरुचि मानती हैं कि शूटिंग का खेल बाहर से जितना आसान दिखता है, असल में उतना ही मुश्किल है। उन्होंने बताया, "लोग शूटिंग को देखते हैं और सोचते हैं, 'इसमें क्या मुश्किल है? बस खड़े होकर शूट करना है।' लेकिन वे यह नहीं देख पाते कि आपके अंदर क्या चल रहा है। जब हर शॉट मायने रखता है, तब अपने विचारों, अपनी सांसों और अपनी भावनाओं पर काबू रखना ही असली चुनौती है।" सुरुचि अपनी असफलताओं से भी सीखती हैं। उनका मानना है कि अगर वह कोई मेडल नहीं जीत पातीं, तो अपनी गलती ढूंढकर और बेहतर होकर वापसी करती हैं।

NRAI के सपोर्ट ने बदली तैयारी

हरियाणा के भिवानी की गुरु द्रोणाचार्य शूटिंग एकेडमी से शुरुआत करने वाली सुरुचि अपनी सफलता का श्रेय नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) द्वारा बनाए गए सिस्टम को भी देती हैं। उन्होंने कहा, "NRAI ने मुझे सिर्फ मुकाबला करने के मौके से कहीं ज्यादा कुछ दिया है। कोच और कैंप ने मेरे ट्रेनिंग करने, तैयारी करने और अपने खेल को समझने के तरीके को बदल दिया है।" सुरुचि के अनुसार, सबसे बड़ा फायदा यह है कि कोच खिलाड़ियों को बहुत करीब से जानते हैं, जिससे प्रतियोगिता के दौरान मदद मिलती है।

शानदार प्रदर्शन और भविष्य की तैयारी

सुरुचि के हालिया प्रदर्शन उनकी प्रतिभा को दर्शाते हैं। उन्होंने 2025 सीजन का अंत दोहा में ISSF वर्ल्ड कप फाइनल में जूनियर वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ किया था। इसके बाद 2026 में नई दिल्ली में एशियन राइफल/पिस्टल चैंपियनशिप में मिक्स्ड टीम का सिल्वर मेडल जीता। म्यूनिख में हुए ISSF वर्ल्ड कप में उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल में ऐतिहासिक 'वन-टू फिनिश' भी हासिल किया। अब एशियन गेम्स को लेकर उनका लक्ष्य स्पष्ट है। वह कहती हैं, "मैं नतीजा नहीं सोचना चाहती। मैं बस हर शॉट के लिए लड़ना चाहती हूं, अपना 100 प्रतिशत देना चाहती हूं और रेंज से यह जानते हुए निकलना चाहती हूं कि मैंने उस मेडल के लिए अपना सब कुछ दिया।"

इनपुट: IANS

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News4Social स्पोर्ट्स डेस्क

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