भवानी देवी: ओलंपिक में भारत की पहली तलवारबाज़, जिन्होंने रचा इतिहास
भारतीय तलवारबाज़ी के इतिहास में सीए भवानी देवी का नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। वह ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाली पहली और एशियाई चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली भी पहली भारतीय तलवारबाज़ हैं। 27 अगस्…
भारतीय तलवारबाज़ी के इतिहास में सीए भवानी देवी का नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। वह ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाली पहली और एशियाई चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली भी पहली भारतीय तलवारबाज़ हैं। 27 अगस्त 1993 को चेन्नई में जन्मीं चदलवाड़ा आनंदा भवानी देवी ने महज़ 11 साल की उम्र में ही तलवारबाज़ी का सफ़र शुरू कर दिया था।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, दसवीं कक्षा के बाद उन्होंने केरल के थालास्सेरी स्थित साई (SAI) केंद्र से तलवारबाज़ी के गुर सीखे। सिर्फ़ 14 साल की उम्र में तुर्की में अपने पहले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के बाद भवानी ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज वह इस खेल में भारत का वैश्विक चेहरा बन चुकी हैं।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन
भवानी देवी ने लगातार अपने प्रदर्शन से देश का मान बढ़ाया है। उन्होंने 2018 में कैनबरा और 2022 में लंदन में आयोजित कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में व्यक्तिगत स्पर्धा का स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इससे पहले 2014 में उन्होंने एशियन अंडर-23 चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था।
ऐतिहासिक उपलब्धियाँ और सम्मान
2020 टोक्यो ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर भवानी देवी ने इतिहास रच दिया था, क्योंकि वह ऐसा करने वाली पहली भारतीय तलवारबाज़ बनीं। इसके अलावा, 2023 में एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने एक और कीर्तिमान स्थापित किया। तलवारबाज़ी में उनके असाधारण योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 2021 में प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया।
इनपुट: IANS


