सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से बाहर, टीम से छुट्टी: मुश्किल दौर से निकलकर ईशान किशन ने कैसे लिखी शानदार वापसी की कहानी
2023 में भारतीय क्रिकेट टीम में अपनी जगह लगभग पक्की कर चुके ईशान किशन का करियर अचानक ढलान पर आ गया था। निजी कारणों से दक्षिण अफ्रीका दौरे से नाम वापस लेने और फिर घरेलू क्रिकेट न खेलने के फैसले ने…
2023 में भारतीय क्रिकेट टीम में अपनी जगह लगभग पक्की कर चुके ईशान किशन का करियर अचानक ढलान पर आ गया था। निजी कारणों से दक्षिण अफ्रीका दौरे से नाम वापस लेने और फिर घरेलू क्रिकेट न खेलने के फैसले ने उन्हें BCCI के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से बाहर कर दिया। टीम के दरवाज़े भी बंद हो गए, लेकिन इस विकेटकीपर-बल्लेबाज ने हार नहीं मानी और घरेलू क्रिकेट के रास्ते दमदार वापसी की।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, ईशान के लिए यह दौर बेहद चुनौतीपूर्ण था। एक समय वनडे में दोहरा शतक जड़ने और टेस्ट डेब्यू करने वाले इस खिलाड़ी के नाम पर चयन समिति की बैठकों में चर्चा तक बंद हो गई थी। ऐसा लगने लगा था कि उनका अंतरराष्ट्रीय करियर संकट में है, लेकिन उन्होंने घरेलू क्रिकेट को अपनी वापसी का ज़रिया बनाया।
घरेलू क्रिकेट में ज़ोरदार प्रदर्शन
एक ब्रेक के बाद तरोताज़ा होकर लौटे ईशान किशन ने घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया। उन्हें सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के लिए झारखंड का कप्तान बनाया गया। इस मौके का फायदा उठाते हुए उन्होंने 10 मैचों में 57 की औसत और 197 के तूफ़ानी स्ट्राइक रेट से 517 रन बनाए। बल्लेबाज़ी ही नहीं, उनकी कप्तानी में झारखंड ने खिताब भी जीता।
घरेलू क्रिकेट में इस दमदार प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान एक बार फिर उनकी ओर खींचा। नतीजा यह हुआ कि भारतीय टीम में उनकी वापसी हुई।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर फिर से साबित किया खुद को
ईशान ने टीम इंडिया में वापसी के मौके को दोनों हाथों से भुनाया। उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज़ में एक शतक और एक अर्धशतक लगाया। इसके बाद अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे में भी शतक जड़कर अपनी काबिलियत साबित की। 2026 के टी20 विश्व कप में भी उनका बल्ला जमकर बोला, जहाँ उन्होंने 9 मैचों में 193 के स्ट्राइक रेट से 317 रन बनाए और भारत के दूसरे सर्वोच्च स्कोरर रहे।
दलीप ट्रॉफी में कप्तानी और बल्ले से दिखाया दम
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जगह पक्की होने के बाद भी ईशान ने घरेलू क्रिकेट का महत्व समझा और दलीप ट्रॉफी में खेलने उतरे। यहाँ उन्हें ईस्ट ज़ोन की कप्तानी सौंपी गई। उनकी अगुवाई में टीम ने 13 साल बाद खिताब अपने नाम किया। फाइनल में साउथ ज़ोन के खिलाफ उन्होंने पहली पारी में 270 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली और मैच में कुल 350 रन बनाए। फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में बतौर कप्तान उनका विजय रथ 2018 से जारी है और उन्होंने लगातार पिछले 16 मुकाबलों में जीत दर्ज की है।
इनपुट: IANS


