रविवार, 1 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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काजीरंगा में रिज़ॉर्ट बनाने की योजना: एक्टर अदिवि शेष ने पूछा- 'क्या हर ज़मीन पर व्यावसायिक निर्माण ज़रूरी है?'

मशहूर अभिनेता अदिवि शेष ने असम के काजीरंगा में एक पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र में प्रस्तावित रिज़ॉर्ट निर्माण पर गंभीर चिंता जताई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उन्होंने असम सरकार से इस योजना पर…

काजीरंगा में रिज़ॉर्ट बनाने की योजना: एक्टर अदिवि शेष ने पूछा- 'क्या हर ज़मीन पर व्यावसायिक निर्माण ज़रूरी है?'
(फोटो: IANS)

मशहूर अभिनेता अदिवि शेष ने असम के काजीरंगा में एक पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र में प्रस्तावित रिज़ॉर्ट निर्माण पर गंभीर चिंता जताई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उन्होंने असम सरकार से इस योजना पर पुनर्विचार करने की अपील करते हुए वन्यजीवों, पर्यावरण और स्थानीय समुदायों पर पड़ने वाले असर को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है।

अदिवि ने राज्य सरकार को एक पत्र लिखकर इस निर्माण के संभावित प्रभावों की सावधानीपूर्वक समीक्षा करने और ज़मीन से जुड़ी जानकारी में पूरी पारदर्शिता बरतने की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया, “हमें खुद से पूछना चाहिए कि क्या ज़मीन के हर हिस्से को व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए विकसित करना ज़रूरी है?”

प्रकृति के संरक्षक, मालिक नहीं

अपनी चिंता ज़ाहिर करते हुए अदिवि शेष ने कहा कि प्रकृति किसी की निजी संपत्ति नहीं है, बल्कि इंसान कुछ समय के लिए सिर्फ़ उसका संरक्षक है। उन्होंने कहा, “जब हम काजीरंगा जैसी जगह की बात करते हैं, तो हम सिर्फ़ किसी नेशनल पार्क या टूरिस्ट डेस्टिनेशन की बात नहीं कर रहे होते। हम एक ऐसे जीवंत इकोसिस्टम की बात कर रहे हैं, जो पीढ़ियों से मौजूद है। यह अनोखे वन्यजीवों का घर है और हमारी ऐसी प्राकृतिक धरोहर है, जो हर भारतीय और कई मायनों में पूरी दुनिया की है।”

गैंडे और स्थानीय समुदाय का भविष्य दाँव पर

एक सींग वाले गैंडे के लिए प्रसिद्ध काजीरंगा के इकोसिस्टम को बचाने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा कि यह जानवर सिर्फ़ असम की पहचान नहीं, बल्कि भारत की शानदार जैव विविधता का प्रतीक भी है। अदिवि ने चेतावनी दी, “जब किसी जानवर का प्राकृतिक ठिकाना छिन जाता है... तो पहले जैसा संतुलन वापस लाना बेहद मुश्किल हो सकता है।”

इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय समुदायों की आवाज़ को भी फैसलों में शामिल करने की वकालत की। उन्होंने कहा, “इन लोगों की ज़िंदगी, रोजी-रोटी और परंपराएं पीढ़ियों से इस ज़मीन और प्रकृति से जुड़ी हुई हैं... अगर उन लोगों को ही चर्चा से बाहर रखा जाएगा, जो पीढ़ियों से प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर रहते आए हैं, तो संरक्षण की कोशिशें सफल नहीं हो सकतीं।”

अभिनेता ने सरकार से अपील की कि कोई भी अपरिवर्तनीय फ़ैसला लेने से पहले एक स्वतंत्र पर्यावरणीय आकलन कराया जाए और सभी पहलुओं की गहन जाँच की जाए।

इनपुट: IANS

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