एक मां का संघर्ष बना हज़ारों बच्चों की उम्मीद: सेरेब्रल पाल्सी के लिए बनाया ख़ास सीटिंग सिस्टम, राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित
जब स्कूल ने सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित बेटे को दाखिला देने से मना कर दिया, तो राजस्थान की एक मां ने हार नहीं मानी। उन्होंने इस चुनौती को एक अवसर में बदल दिया और ऐसा समाधान खोज निकाला, जो अब देशभर के…
जब स्कूल ने सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित बेटे को दाखिला देने से मना कर दिया, तो राजस्थान की एक मां ने हार नहीं मानी। उन्होंने इस चुनौती को एक अवसर में बदल दिया और ऐसा समाधान खोज निकाला, जो अब देशभर के हज़ारों दिव्यांग बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बन सकता है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पाली जिले की रहने वाली मनोवैज्ञानिक नेहा सोलंकी ने अपने बेटे के लिए एक विशेष 'अडैप्टिव सीटिंग सिस्टम' विकसित किया है, जिसके लिए उन्हें अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है।
यह कहानी साल 2023 में शुरू हुई, जब नेहा अपने बेटे दुरंजय का दाखिला कराने के लिए एक स्कूल पहुंचीं। स्कूल के प्रधानाचार्य ने यह कहते हुए प्रवेश देने से इनकार कर दिया कि दुरंजय बिना सहारे के बैठ नहीं सकता और स्कूल में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। इस घटना ने नेहा को झकझोर दिया, लेकिन उन्होंने तय किया कि वह न सिर्फ अपने बेटे, बल्कि उन सभी बच्चों के लिए रास्ता बनाएंगी जो सुविधाओं की कमी के कारण शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।
ज़रूरत से जन्मा एक अनूठा अविष्कार
नेहा का बेटा दुरंजय, गर्भावस्था के 27वें सप्ताह में ही पैदा हो गया था और जन्म के समय उसका वज़न मात्र 900 ग्राम था। बाद में पता चला कि उसे सेरेब्रल पाल्सी है। कई स्कूलों के चक्कर काटने के बाद नेहा ने रिहैबिलिटेशन साइकोलॉजी में मास्टर डिग्री हासिल की। अपनी पढ़ाई के दौरान उन्हें एहसास हुआ कि कमी बच्चों में नहीं, बल्कि हमारे सिस्टम में है, जहाँ विशेष ज़रूरतों वाले बच्चों के लिए सहायक उपकरणों का अभाव है।
इसी सोच के साथ, उन्होंने फिजियोथेरेपिस्ट और ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट की मदद से 3 से 12 साल के बच्चों के लिए एक स्वदेशी अडैप्टिव सीटिंग सिस्टम तैयार किया। इसे बनाने और इसका अध्ययन करने में उन्हें करीब नौ महीने लगे। यह विशेष कुर्सी बच्चों के शरीर को ज़रूरी सहारा देती है, जिससे वे पढ़ाई, लिखने और खाने जैसी गतिविधियों के दौरान ज़्यादा सुरक्षित और आराम से बैठ पाते हैं। इससे उनके गिरने का खतरा भी कम होता है।
राष्ट्रपति मुर्मु से मिलेगा सम्मान
इस सीटिंग सिस्टम के इस्तेमाल से नेहा के बेटे दुरंजय की रोज़मर्रा की गतिविधियों में काफ़ी सुधार हुआ है और वह पहले से ज़्यादा आत्मनिर्भर हो गया है। इस नवाचार के सामाजिक प्रभाव को देखते हुए नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन ने नेहा सोलंकी को देशभर के 26 नवोन्मेषकों में चुना है। उन्हें 31 जुलाई को नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा 'ग्रासरूट्स इनोवेटर रिकग्निशन 2026' पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
इनपुट: IANS


