गुजरात का खिजाडिया अभयारण्य: काली गर्दन वाले सारस के लिए बना एक आदर्श और सुरक्षित घर
गुजरात के जामनगर जिले में स्थित खिजाडिया पक्षी अभयारण्य, भारत के सबसे खास जलपक्षियों में से एक, ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क (काली गर्दन वाले सारस) के लिए एक बेहद सफल प्रजनन स्थल के रूप में उभरा है। समाचार…
गुजरात के जामनगर जिले में स्थित खिजाडिया पक्षी अभयारण्य, भारत के सबसे खास जलपक्षियों में से एक, ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क (काली गर्दन वाले सारस) के लिए एक बेहद सफल प्रजनन स्थल के रूप में उभरा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि यह रामसर साइट इन पक्षियों को न केवल आकर्षित करती है, बल्कि उनके वंश को आगे बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और आदर्श वातावरण भी प्रदान करती है।
यह अध्ययन गुजरात वन विभाग के तहत काम करने वाली संस्था, गुजरात इकोलॉजिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (GEER) फाउंडेशन के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया। शोध के दौरान अध्ययन में शामिल किए गए सभी चार घोंसलों में 100 प्रतिशत प्रजनन सफलता दर दर्ज की गई, जो भारत के अन्य क्षेत्रों की तुलना में काफी उल्लेखनीय है।
प्रजनन की शानदार सफलता
शोधकर्ताओं ने जुलाई 2024 से मार्च 2025 तक चले इस अध्ययन में पाया कि चारों सक्रिय घोंसलों में से प्रत्येक में एक प्रजनन जोड़े ने दो बच्चों को सफलतापूर्वक पाला। इस तरह, कुल आठ बच्चे दर्ज किए गए। GEER फाउंडेशन के निदेशक बी.पी. पति के अनुसार, शोधकर्ताओं ने 48 सैंपलिंग पॉइंट्स पर 320 घंटे से अधिक समय तक अवलोकन किया। उन्होंने यह भी बताया कि आठ बच्चों के अलावा, अभयारण्य में नियमित रूप से पांच गैर-प्रजनन वयस्क पक्षियों समेत कुल 21 से ज़्यादा सारस देखे गए।
माता-पिता की अद्भुत ज़िम्मेदारी
अध्ययन के सबसे दिलचस्प पहलुओं में से एक इन पक्षियों का अपने बच्चों के प्रति समर्पण था। GEER फाउंडेशन के वैज्ञानिक डॉ. संदीप मुंजपरा ने बताया कि वयस्क सारस औसतन 62 मिनट तक घोंसले में मौजूद रहते थे। भोजन लाने की 94 प्रतिशत उड़ानों में, एक साथी के लौटने पर ही दूसरा घोंसला छोड़ता था। यह समन्वित देखभाल सुनिश्चित करती है कि अंडे और बच्चे हर समय सुरक्षित रहें। अध्ययन के दौरान किसी भी बच्चे की मृत्यु या शिकारी द्वारा हमले की कोई घटना नहीं हुई।
घोंसले और आवास की विशेषताएं
शोध में पाया गया कि सभी चार घोंसले बबूल के पेड़ों पर 3 से 4.5 मीटर की ऊंचाई पर बनाए गए थे। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) डॉ. जयपाल सिंह ने बताया कि इन पक्षियों के सफल प्रजनन के लिए सिर्फ पानी ही काफी नहीं, बल्कि उथले पानी वाले भोजन क्षेत्र, जलीय शिकार, घोंसला बनाने लायक पेड़ और कम मानवीय हस्तक्षेप जैसी परिस्थितियाँ भी ज़रूरी हैं। खिजाडिया में ये सभी तत्व मौजूद हैं, जो इस प्रजाति के संरक्षण के लिए इस जगह के महत्व को और बढ़ाता है।
इस शोध के निष्कर्षों की सराहना करते हुए, राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा, "इस अध्ययन ने ब्लैक-नेक्ड सारस पक्षी के अद्भुत व्यवहार एवं प्रजनन पारिस्थितिकी पर नया प्रकाश डाला है। इन निष्कर्षों के आधार पर हम इस पक्षी के संरक्षण के बारे में प्रभावी कदम उठा सकेंगे।"
इनपुट: IANS


