रविवार, 30 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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एशियाई गोल्ड जीतकर रचा इतिहास, जिम्नास्ट अरिहा बोलीं – 'जब राष्ट्रगान बजा, वह पल शानदार था'

एरोबिक जिम्नास्टिक्स में भारत के लिए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने वाली अरिहा पंगमबम ने उस अनुभव को शानदार बताया है, जब पोडियम पर उनके लिए राष्ट्रगान बजा। कुछ हफ़्ते पहले फिलीपींस में हुई एशियन एरोबिक…

एशियाई गोल्ड जीतकर रचा इतिहास, जिम्नास्ट अरिहा बोलीं – 'जब राष्ट्रगान बजा, वह पल शानदार था'
(फोटो: IANS)

एरोबिक जिम्नास्टिक्स में भारत के लिए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने वाली अरिहा पंगमबम ने उस अनुभव को शानदार बताया है, जब पोडियम पर उनके लिए राष्ट्रगान बजा। कुछ हफ़्ते पहले फिलीपींस में हुई एशियन एरोबिक जिम्नास्टिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की, जिसके साथ वह सीनियर महिला व्यक्तिगत वर्ग में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय जिम्नास्ट बन गईं। समाचार एजेंसी IANS के साथ बातचीत में उन्होंने इस जीत से जुड़ी अपनी भावनाओं और मुश्किल ट्रेनिंग के सफ़र को साझा किया।

22 वर्षीय अरिहा ने फाइनल में 19.100 का स्कोर हासिल किया था, जिसमें कलात्मकता (Artistry) के लिए 8.650, प्रदर्शन (Execution) के लिए 7.600 और कठिनाई (Difficulty) के लिए 2.850 अंक शामिल थे।

जीत का वह अविस्मरणीय पल

अरिहा ने कहा, "जब मुझे यह गोल्ड मेडल मिला, तो वह पल बहुत शानदार था। मैं इसे शब्दों में बयां भी नहीं कर सकती।" उन्होंने आगे कहा, "हम बस दूसरे देशों का राष्ट्रगान बजते हुए सुनते थे, और मैं सोचती थी कि पोडियम पर हमारा राष्ट्रगान कब सुनाई देगा? तो जब इस साल मुझे मेडल मिला और हमारा राष्ट्रगान बजा, तो वह वाकई बहुत शानदार अनुभव था। यह न सिर्फ मेरे लिए, बल्कि हमारी पूरी टीम के लिए एक बहुत बड़ा पल था।"

सुविधाओं की कमी से जुड़ी चुनौतियां

इस ऐतिहासिक जीत के बावजूद अरिहा ने भारत में ट्रेनिंग सुविधाओं की कमी पर ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया, "हम डबल फ्लेक्स फ्लोर, यानी लकड़ी का फ्लोर इस्तेमाल करते हैं। भारत में उत्तराखंड में एक फ्लोर है... लेकिन दुर्भाग्य से, पूरे भारत के ज्यादातर जिम्नास्ट उस पर ट्रेनिंग भी नहीं कर पाए।" उन्होंने कहा कि वे आमतौर पर रबर इंटरलॉकिंग मैट पर अभ्यास करते हैं, जिससे प्रतियोगिता के दौरान सिर्फ एक दिन में लकड़ी के फ्लोर के साथ तालमेल बिठाना बहुत मुश्किल हो जाता है।

परिवार और कोच का मिला पूरा साथ

अरिहा ने अपनी सफलता का श्रेय कोच को देते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ स्किल्स ही नहीं, बल्कि जीवन से जुड़ी कई बातें भी सिखाईं। प्रतियोगिता के दौरान उनके माता-पिता घर से लाइवस्ट्रीम देख रहे थे, लेकिन उनकी बहन उसी कैटेगरी में उनके साथ प्रतिस्पर्धा कर रही थीं, जिसे उन्होंने एक अच्छा पल बताया।

इस जीत पर डेलिगेशन के हेड इंदरजीत सिंह राठौर ने कहा, "जब अरिहा ने ऐसा किया, तो हमारी 49 लोगों की पूरी टीम खुशी से रो पड़ी।" उन्होंने उम्मीद जताई कि इस एशियाई जीत के बाद भारतीय टीम भविष्य में वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीत सकती है और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सरकार व कॉर्पोरेट जगत से मदद की अपील की।

इनपुट: IANS

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News4Social स्पोर्ट्स डेस्क

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