जिम्बाब्वे में 3 मैचों में 6 विकेट: रवि बिश्नोई ने बताया कैसे सुधारी अपनी गेंदबाजी की गलतियां
भारतीय लेग स्पिनर रवि बिश्नोई के लिए जिम्बाब्वे का दौरा बेहद सफल रहा, जहां उन्होंने तीन T20 मैचों में 6 विकेट लेकर भारत की 3-0 से सीरीज जीत में अहम भूमिका निभाई। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, बिश्नोई…
भारतीय लेग स्पिनर रवि बिश्नोई के लिए जिम्बाब्वे का दौरा बेहद सफल रहा, जहां उन्होंने तीन T20 मैचों में 6 विकेट लेकर भारत की 3-0 से सीरीज जीत में अहम भूमिका निभाई। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, बिश्नोई ने इस शानदार प्रदर्शन का श्रेय बेंगलुरु में बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) में की गई कड़ी मेहनत को दिया है, जहां उन्होंने अपनी गेंदबाजी की तकनीकी खामियों को दूर किया।
बिश्नोई ने माना कि इससे पहले इंग्लैंड दौरे पर उन्हें कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ा था। मैनचेस्टर में हुए एक मैच में उन्होंने तीन बैक-फुट नो-बॉल फेंकी थीं और 60 रन लुटा दिए थे, जिससे टीम को नुकसान हुआ। उन्होंने बताया कि इस अनुभव के बाद उन्होंने अपनी गेंदबाजी का विश्लेषण किया और कमजोरियों को सुधारने पर ध्यान केंद्रित किया।
कोचों की सलाह से रन-अप में किया सुधार
अपनी गेंदबाजी में आए बदलाव पर बात करते हुए बिश्नोई ने कहा, "मैंने उन क्षेत्रों पर काम किया जिनमें सुधार की जरूरत थी क्योंकि मेरी गेंदबाजी में कुछ गलतियां थीं। मैंने उन पर मेहनत की और अब उसके नतीजे दिखाई दे रहे हैं।" उन्होंने बताया कि अनुभवी कोच साईराज बहुतुले और सुनील जोशी ने उन्हें रन-अप की दिशा को सही करने में मदद की, जो पहले गलत जा रहा था और उनके नियंत्रण को प्रभावित कर रहा था। बिश्नोई ने कहा, "मुझे कोचों से काफी समर्थन मिला। उन्होंने मुझे बताया कि मुझे किन चीजों पर ध्यान देना है।"
पिच और मैदान का उठाया फायदा
हरारे स्पोर्ट्स क्लब की पिचें स्पिनरों के लिए बहुत मददगार नहीं थीं, लेकिन बिश्नोई ने अपनी सीधी और तेज गेंदों से बल्लेबाजों को परेशान किया। उन्होंने यह भी कहा कि हरारे के बड़े मैदान गेंदबाजों के लिए फायदेमंद साबित हुए, क्योंकि वहां बल्लेबाजों के लिए बड़े शॉट खेलना आसान नहीं था। यह दौरा बिश्नोई के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाला साबित हुआ, जहां उन्होंने अपनी तकनीकी कमियों को दूर कर एक बार फिर प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
इनपुट: IANS


