नेपाल के गांव से शूटिंग रेंज तक: जीतू राय, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का परचम लहराया
भारतीय निशानेबाजी के चमकते सितारों में से एक जीतू राय की कहानी प्रेरणा और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। 26 अगस्त 1987 को नेपाल के संखुवासाभा में जन्मे जीतू ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक…
भारतीय निशानेबाजी के चमकते सितारों में से एक जीतू राय की कहानी प्रेरणा और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। 26 अगस्त 1987 को नेपाल के संखुवासाभा में जन्मे जीतू ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीतकर दुनिया भर में भारत का मान बढ़ाया है। उनका बचपन निशानेबाजी से कोसों दूर, अपने गांव के खेतों में भैंस-बकरियों के बीच बीता था।
जीतू के पिता भारतीय सेना की गोरखा राइफल्स रेजिमेंट में थे और उन्होंने 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में भी हिस्सा लिया था। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, महज़ 19 साल की उम्र में पिता का साया सिर से उठने के बाद जीतू ने भी उन्हीं के नक्शेकदम पर चलते हुए भारतीय सेना में शामिल होने का फैसला किया। सेना में आने के बाद ही उनका रुझान निशानेबाजी की ओर बढ़ा और 2013 से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिस्सा लेना शुरू कर दिया।
सफलता का स्वर्णिम दौर
जीतू राय के लिए साल 2014 मील का पत्थर साबित हुआ, जब उन्होंने विश्व कप, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स, तीनों में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इसी सफलता ने उन्हें भारतीय निशानेबाजी जगत में एक स्थापित नाम बना दिया। हालांकि, 2016 के रियो ओलंपिक में फाइनल तक पहुंचने के बाद भी उन्हें आठवें स्थान से संतोष करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा।
प्रमुख उपलब्धियां और सम्मान
10 मीटर एयर पिस्टल और 50 मीटर पिस्टल में माहिर जीतू की उपलब्धियों की सूची काफी लंबी है। उन्होंने 2014 में इंचियोन एशियन गेम्स (50 मीटर पिस्टल) और ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स (50 मीटर पिस्टल) में स्वर्ण पदक अपने नाम किए। इसके अलावा, 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स में भी उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता था। विश्व कप की बात करें तो 2014 में मारीबोर और 2017 में नई दिल्ली में भी उन्होंने स्वर्ण पदकों पर निशाना साधा।
निशानेबाजी में उनके असाधारण योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 2015 में 'अर्जुन पुरस्कार', 2016 में 'मेजर ध्यान चंद खेल रत्न पुरस्कार' और 2020 में 'पद्मश्री' जैसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों से नवाज़ा है।
इनपुट: IANS


