पैरा-एथलीटों की सफलता से सामान्य एथलीट भी ले रहे प्रेरणा: कोच सत्यनारायण
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पैरा-एथलेटिक्स में भारत के शानदार प्रदर्शन ने एक नई मिसाल कायम की है। पुरुषों की 100 मीटर T47 स्पर्धा में दिलीप महादू गावित और मोहम्मद बासिल मोरसिंगनाकाथी ने क्रमशः गोल्ड और…
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पैरा-एथलेटिक्स में भारत के शानदार प्रदर्शन ने एक नई मिसाल कायम की है। पुरुषों की 100 मीटर T47 स्पर्धा में दिलीप महादू गावित और मोहम्मद बासिल मोरसिंगनाकाथी ने क्रमशः गोल्ड और सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया। इस ऐतिहासिक जीत के बाद, पैरा-एथलेटिक्स कोच सत्यनारायण शिमोगा का मानना है कि पैरा-खिलाड़ियों की यह सफलता सामान्य एथलीटों को भी विश्व स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित कर रही है।
समाचार एजेंसी IANS से बात करते हुए कोच सत्यनारायण ने कहा, "पैरा खेलों की सफलता से सामान्य एथलीट भी यह मानने लगे हैं कि वे मेडल जीत सकते हैं। हम हमेशा अपने एथलीट से कहते हैं कि कड़ी मेहनत करें, और अच्छे नतीजे मिलेंगे। आज, भारत पैरा खेलों में बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।" उन्होंने इस बात पर भी संतोष जताया कि दिलीप और बासिल ने उनकी उम्मीदों के मुताबिक ही पोडियम पर पहले दो स्थान हासिल किए।
कोच का मास्टरस्ट्रोक और दिलीप की मेहनत
दिलीप गावित के गोल्ड मेडल के पीछे कोच सत्यनारायण का एक अहम फैसला भी था। उन्होंने बताया, "दिलीप पहले 400 मीटर रेस में दौड़ते थे, लेकिन मैंने उसे 100 मीटर में शिफ्ट कर दिया। मैंने उन्हें दुबई भेजा, जहां उन्होंने सीडब्ल्यूजी के लिए क्वालीफाई किया।" दिलीप ने न सिर्फ स्वर्ण पदक जीता, बल्कि गेम्स का नया रिकॉर्ड भी बनाया।
चुनौतियों से जीत तक का सफर
महाराष्ट्र के एक छोटे से गाँव तोरण डोंगरी से आने वाले दिलीप का जीवन आसान नहीं रहा। बचपन में करीब पांच-छह साल की उम्र में एक पेड़ से गिरने के कारण उनके दाहिने हाथ में गंभीर चोट आई। सही समय पर इलाज न मिलने से उन्हें कोहनी के नीचे से अपना हाथ खोना पड़ा। लेकिन इस झटके को उन्होंने अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और दौड़ने के अपने जुनून को पैरा-एथलेटिक्स में करियर बनाकर पूरा किया। कोच सत्यनारायण कहते हैं, "अपनी जिंदगी में इतने बड़े झटके के बावजूद, भगवान ने उन्हें जिंदगी में कुछ बड़ा करने का रास्ता दिखाया और हम सभी ने उनका साथ दिया।"
दिलीप ने इससे पहले 2022 के एशियन पैरा गेम्स में भी 400 मीटर T47 स्पर्धा में गोल्ड जीता था, जो उस प्रतियोगिता में भारत का 100वां पदक था। इसके अलावा, उन्होंने पेरिस 2024 पैरालंपिक में भी 400 मीटर T47 इवेंट के फाइनल में पहुंचकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था।
इनपुट: IANS


