कॉमनवेल्थ गेम्स की स्वर्ण विजेता साक्षी चौधरी बोलीं, 'देश में खेल संस्कृति मज़बूत हुई'
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में मुक्केबाजी का स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाने वाली साक्षी चौधरी का मानना है कि भारत में खेल संस्कृति पहले के मुकाबले काफी बेहतर और मज़बूत हुई है। उन्होंने भविष्य की…
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में मुक्केबाजी का स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाने वाली साक्षी चौधरी का मानना है कि भारत में खेल संस्कृति पहले के मुकाबले काफी बेहतर और मज़बूत हुई है। उन्होंने भविष्य की प्रतियोगिताओं, सरकारी पहलों और बढ़ते खेल बजट को इस बदलाव का अहम हिस्सा बताया।
समाचार एजेंसी IANS के साथ एक बातचीत में साक्षी ने कहा, “मैं कहूंगी कि हमारे देश में खेल संस्कृति पहले के मुकाबले काफी बढ़ी है।” उन्होंने 2030 में अहमदाबाद में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 ओलंपिक में भारत के लिए ज़्यादा पदक जीतने के लक्ष्य को सरकार की एक बेहतरीन और प्रशंसनीय पहल बताया। साक्षी के अनुसार, “खेल बजट भी पहले से काफी बढ़ा है। इससे हमें सच में एक जीवंत खेल संस्कृति बनाने में मदद मिलेगी।”
ग्लासगो में दमदार प्रदर्शन
साक्षी चौधरी ने कॉमनवेल्थ गेम्स में महिलाओं की 51 किग्रा बॉक्सिंग स्पर्धा में हिस्सा लिया था। उन्होंने फाइनल मुकाबले में इंग्लैंड की रूबी व्हाइट को 5-0 के एकतरफा फैसले से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। खास बात यह रही कि वह पूरी प्रतियोगिता के दौरान अजेय रहीं और प्री-क्वार्टर फाइनल से लेकर फाइनल तक अपने सभी मुकाबले 5-0 के सर्वसम्मत निर्णय से जीते। उनके प्रदर्शन में तेज मूवमेंट, सटीक कॉम्बिनेशन और सधी हुई रणनीति का शानदार मेल देखने को मिला।
अब एशियाई खेलों पर नज़र
स्वर्ण पदक जीतने को 'सपने के सच होने' जैसा बताते हुए साक्षी ने कहा था कि उनका अगला लक्ष्य एशियाई खेल हैं। उन्होंने कहा, “मैं अपने देश के लिए खेलती हूं। यह लगातार मन में रहने वाला विचार मुझे जोश से भर देता है।” बकौल साक्षी, वह कॉमनवेल्थ गेम्स के अपने अनुभव का इस्तेमाल एशियाई खेलों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए करेंगी।
इनपुट: IANS


