जब सांसद पृथ्वीराज कपूर ने हवाई यात्रा छोड़, थिएटर टीम के साथ थर्ड क्लास में सफ़र करना चुना
भारतीय सिनेमा के इतिहास में पृथ्वीराज कपूर एक ऐसे कलाकार थे, जिनकी सादगी और कला के प्रति समर्पण की मिसालें आज भी दी जाती हैं। राज्यसभा का सांसद बनने के बाद भी उन्होंने अपनी थिएटर टीम का साथ नहीं…
भारतीय सिनेमा के इतिहास में पृथ्वीराज कपूर एक ऐसे कलाकार थे, जिनकी सादगी और कला के प्रति समर्पण की मिसालें आज भी दी जाती हैं। राज्यसभा का सांसद बनने के बाद भी उन्होंने अपनी थिएटर टीम का साथ नहीं छोड़ा और उनके साथ तीसरे दर्जे के डिब्बे में यात्रा करना जारी रखा। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, कपूर ने अपनी थिएटर कंपनी के साथ 16 वर्षों में देश के 112 शहरों का दौरा किया और 2,662 शो में खुद मुख्य भूमिका निभाई।
3 नवंबर 1906 को पंजाब के समुंदरी (अब पाकिस्तान में) में जन्मे पृथ्वीराज कपूर के पिता पुलिस अधिकारी थे। बचपन से ही उन्हें अभिनय का शौक था, जिसके चलते उन्होंने पेशावर में कानून की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और अपने सपनों को पूरा करने के लिए 1928 में मुंबई आ गए।
फ़िल्मी सफ़र की दमदार शुरुआत
शुरुआती संघर्ष के बाद, पृथ्वीराज कपूर को 1930 की मूक फिल्म 'सिनेमा गर्ल' से पहचान मिलनी शुरू हुई। इसके ठीक एक साल बाद, उन्होंने भारत की पहली बोलती फिल्म 'आलम आरा' (1931) में काम किया, जहाँ उनकी दमदार आवाज़ और अभिनय ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने सोहराब मोदी की फिल्म 'सिकंदर' (1941) में सिकंदर का किरदार निभाकर बड़ी प्रसिद्धि हासिल की। बाद में वे 'आवारा', 'दहेज' और 'मुगल-ए-आजम' जैसी ऐतिहासिक फिल्मों का हिस्सा बने।
थिएटर के लिए अटूट जुनून
फिल्मों में अपार सफलता के बावजूद, पृथ्वीराज कपूर का पहला प्यार हमेशा थिएटर ही रहा। इसी जुनून के चलते उन्होंने 1944 में अपनी मशहूर थिएटर कंपनी 'पृथ्वी थिएटर्स' की स्थापना की। इसका उद्देश्य देश के कोने-कोने में सार्थक नाटक पहुंचाना था। कंपनी ने 'शकुंतला', 'दीवार', 'पठान' और 'पैसा' जैसे नाटक प्रस्तुत किए, जिनमें सामाजिक मुद्दों से लेकर हिंदू-मुस्लिम एकता और देश के बंटवारे जैसे विषयों को उठाया गया।
पृथ्वी थिएटर्स का यह सफर 16 साल तक चला। थिएटर की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, इस दौरान पूरी टीम ने 112 शहरों में 2,662 शो किए। खास बात यह थी कि पृथ्वीराज कपूर ने हर एक शो में मुख्य भूमिका निभाई।
सांसद, फिर भी सादगी बरकरार
पृथ्वीराज कपूर 1952 से 1960 तक राज्यसभा के मनोनीत सदस्य भी रहे। सांसद के तौर पर उन्हें हवाई जहाज या प्रथम श्रेणी में यात्रा करने की सुविधा प्राप्त थी, लेकिन उन्होंने अपनी टीम से अलग सफ़र करना कभी पसंद नहीं किया। वह अपनी पूरी टीम के साथ तीसरे दर्जे में ही यात्रा करते रहे। 1960 में खराब स्वास्थ्य के कारण पृथ्वी थिएटर्स को बंद करना पड़ा।
भारतीय सिनेमा और थिएटर में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें 1969 में पद्म भूषण और 1971 में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कैंसर से जूझते हुए 29 मई 1972 को उनका निधन हो गया।
इनपुट: IANS


