लॉर्ड्स में ऐतिहासिक महिला टेस्ट: सचिन तेंदुलकर ने कहा- 'यह तो बस शुरुआत है'
क्रिकेट के 'मास्टर ब्लास्टर' सचिन तेंदुलकर ने लंदन के ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए पहले महिला टेस्ट मैच को खेल के लिए एक 'सुनहरा पल' बताया है। उनका मानना है कि यह महिला…
क्रिकेट के 'मास्टर ब्लास्टर' सचिन तेंदुलकर ने लंदन के ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए पहले महिला टेस्ट मैच को खेल के लिए एक 'सुनहरा पल' बताया है। उनका मानना है कि यह महिला क्रिकेट के विकास की दिशा में एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम है, जिसकी यह सिर्फ़ एक शानदार शुरुआत है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, तेंदुलकर ने लॉर्ड्स में 4 दिनों तक चले इस टेस्ट मैच को देखने पहुँचे 37,846 दर्शकों की संख्या पर भी खुशी जताई। उन्होंने कहा, "मैं पढ़ रहा था कि चार दिनों में 30,000 से ज्यादा लोग आए थे, जो बहुत बढ़िया है। यह तो बस शुरुआत है। मुझे यकीन है कि आगे हमारे लिए और भी बड़ी चीजें होने वाली हैं।" इस ऐतिहासिक टेस्ट में भारतीय टीम ने इंग्लैंड को 270 रनों से मात दी।
महिला क्रिकेट के लिए 'सुनहरा पल'
सचिन तेंदुलकर, जिन्होंने सोमवार को मैच के चौथे दिन की सुबह भारतीय टीम से मुलाकात भी की थी, ने इस आयोजन को महिला क्रिकेट के लिए मील का पत्थर बताया। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) द्वारा जारी एक वीडियो में उन्होंने कहा, "महिला क्रिकेट के लिए यह एक बड़ा पल है... मैंने हमेशा टेस्ट क्रिकेट को क्रिकेट का सबसे ऊंचा स्तर माना है। इसलिए यह एक शानदार मौका है। मैं इसे महिला क्रिकेट में एक सुनहरा पल कहूंगा।"
उन्होंने इस पहल के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के साथ-साथ BCCI सचिव जय शाह की भी सराहना की, जिन्होंने भारत में महिला और पुरुष क्रिकेटरों के लिए समान वेतन की शुरुआत की थी।
यादगार प्रदर्शन और लॉर्ड्स की यादें
इस मैच में यस्तिका भाटिया ने लॉर्ड्स में टेस्ट शतक जड़ने वाली पहली महिला क्रिकेटर बनकर इतिहास रचा, वहीं क्रांति गौड़ ने टेस्ट प्रारूप में पहली बार पांच विकेट हासिल किए। तेंदुलकर ने इन उपलब्धियों को विशेष बताते हुए कहा, "यह एक बड़ा पल है क्योंकि कई शानदार प्रदर्शन होंगे, और भी जीत होंगी, नए रिकॉर्ड बनेंगे, लेकिन ये नाम हमेशा सबसे पहले लिए जाएंगे।"
इस मौके पर तेंदुलकर ने लॉर्ड्स से जुड़ी अपनी पुरानी यादों को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे वह 14 साल की उम्र में पहली बार इस मैदान पर आए थे और दो साल बाद ही भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम में बैठे थे।
इनपुट: IANS


