विरासत में मिली पहलवानी और फिर दुनिया जीती: हरियाणा की अंशु मलिक का प्रेरणादायक सफर
हरियाणा के जींद की रहने वालीं अंशु मलिक ने कुश्ती की दुनिया में भारत का नाम रोशन किया है। यह उस परिवार की बेटी की कहानी है, जिसकी रगों में पहलवानी दौड़ती है। 2021 में विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में रज…
हरियाणा के जींद की रहने वालीं अंशु मलिक ने कुश्ती की दुनिया में भारत का नाम रोशन किया है। यह उस परिवार की बेटी की कहानी है, जिसकी रगों में पहलवानी दौड़ती है। 2021 में विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर उन्होंने इतिहास रच दिया था, क्योंकि ऐसा करने वाली वह पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अंशु के पिता धर्मवीर मलिक खुद 1990 के दशक में भारतीय जूनियर कुश्ती टीम का हिस्सा रह चुके हैं।
5 अगस्त 2001 को जींद के निडानी गांव में जन्मी अंशु का बचपन कुश्ती के माहौल में ही बीता। जहाँ माँ चाहती थीं कि बेटी डॉक्टर बने, वहीं पिता ने बेटी के जुनून को पहचाना और पूरा साथ दिया। महज़ 11 साल की उम्र में अंशु ने पहलवानी सीखने की इच्छा जताई और चौधरी भारत सिंह मेमोरियल स्कूल में उनकी ट्रेनिंग शुरू हो गई, जहाँ उन्होंने बड़े-बड़े पहलवानों को धूल चटाई।
सफलता की सीढ़ियाँ और बड़े खिताब
अंशु मलिक ने अपनी प्रतिभा का लोहा जल्दी ही मनवा लिया। उन्होंने 2016 में एशियन कैडेट चैंपियनशिप का खिताब जीता और 2018 में वर्ल्ड कैडेट और जूनियर चैंपियनशिप में कांस्य पदक अपने नाम किया। इसके अगले ही साल उन्होंने एशियन जूनियर चैंपियनशिप में देश को स्वर्ण पदक दिलाया। साल 2020 में उन्होंने माटेओ पेलिकोन रैंकिंग सीरीज में रजत और एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक हासिल किया।
ओलंपिक से लेकर कॉमनवेल्थ तक
अंशु ने दो बार ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। टोक्यो ओलंपिक 2020 में वह कोहनी की चोट के कारण 'राउंड ऑफ 16' में हार गईं, लेकिन अगले ही साल विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर उन्होंने शानदार वापसी की। 2022 में उन्होंने अपने पहले कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लिया और देश के लिए सिल्वर मेडल जीता। 2024 ओलंपिक के प्री-क्वार्टर फाइनल में उन्हें अमेरिका की हेलेन मारोलिस से हार का सामना करना पड़ा।
एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में तीन बार पदक जीत चुकीं अंशु मलिक को कुश्ती में उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए 2022 में प्रतिष्ठित 'अर्जुन पुरस्कार' से भी सम्मानित किया गया। उनकी मेहनत और अनुशासन आज देश की युवा पीढ़ी के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।
इनपुट: IANS


