प्रोडुनोवा वॉल्ट की 'क्वीन' दीपा करमाकर, जिसने भारतीय जिम्नास्टिक को नई पहचान दी
अगरतला में जन्मी दीपा करमाकर ने जिम्नास्टिक की दुनिया में भारत का नाम उस वक्त रोशन किया, जब उन्होंने रियो 2016 में ओलंपिक फाइनल में जगह बनाई। वह न सिर्फ ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाली देश की पहली…
अगरतला में जन्मी दीपा करमाकर ने जिम्नास्टिक की दुनिया में भारत का नाम उस वक्त रोशन किया, जब उन्होंने रियो 2016 में ओलंपिक फाइनल में जगह बनाई। वह न सिर्फ ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाली देश की पहली जिम्नास्ट बनीं, बल्कि 52 साल के लंबे अंतराल के बाद किसी भारतीय जिम्नास्ट ने इस मंच पर कदम रखा था। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, दीपा रियो ओलंपिक के फाइनल में मामूली अंतर से कांस्य पदक से चूक गईं और चौथे स्थान पर रहीं, लेकिन उनके प्रदर्शन ने पूरे देश का दिल जीत लिया।
दीपा की सबसे बड़ी पहचान 'प्रोडुनोवा वॉल्ट' में उनकी महारत है, जिसे जिम्नास्टिक की दुनिया में बेहद खतरनाक और कठिन माना जाता है। वह दुनिया की उन गिनी-चुनी पांच महिला एथलीट्स में शामिल हैं, जो इस वॉल्ट को सफलतापूर्वक कर पाती हैं। 9 अगस्त 1993 को जन्मी दीपा ने सिर्फ 6 साल की उम्र में कोच सोमा नंदी और बिश्वेश्वर नंदी के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग शुरू की थी। एक दिलचस्प तथ्य यह है कि शुरुआत में उनके पैर चपटे थे, जो जिम्नास्ट के लिए एक बड़ी चुनौती मानी जाती है, लेकिन कड़ी मेहनत से उन्होंने इस बाधा को पार किया।
सफलता की सीढ़ियां और ऐतिहासिक पदक
दीपा करमाकर ने 2008 में जूनियर नेशनल चैंपियनशिप जीतकर पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनकी बड़ी सफलता 2014 में ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में आई, जहाँ उन्होंने कांस्य पदक जीता। यह उपलब्धि हासिल करने वाली वह पहली भारतीय महिला जिम्नास्ट थीं। इसके बाद उन्होंने एशियन चैंपियनशिप में कांस्य और 2015 वर्ल्ड चैंपियनशिप में पांचवां स्थान हासिल कर अपनी काबिलियत साबित की।
जुलाई 2018 में तुर्की के मर्सिन में आयोजित FIG आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक वर्ल्ड चैलेंज कप में दीपा ने वॉल्ट इवेंट में स्वर्ण पदक जीतकर एक और इतिहास रचा। यह किसी भी अंतरराष्ट्रीय इवेंट में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय जिम्नास्ट थीं। 2024 में उन्होंने जिम्नास्टिक से संन्यास ले लिया।
सम्मान और विरासत
खेलों में उनके असाधारण योगदान के लिए भारत सरकार ने दीपा को कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया। उन्हें 2015 में अर्जुन पुरस्कार, 2016 में मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार और 2017 में देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से नवाजा गया।
इनपुट: IANS


