मंगलवार, 15 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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मध्य प्रदेश: काँटों और बारिश के बीच 4 घंटे पड़ी रही नवजात, चरवाहे ने सुनी रोने की आवाज़ और बचाई जान

मध्य प्रदेश के रायसेन ज़िले से एक दिल को छू लेने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक चरवाहे की सजगता ने एक नवजात बच्ची की जान बचा ली। मंगलवार को यह बच्ची एक घने जंगली इलाके में कंटीली झाड़ियों के बीच…

मध्य प्रदेश: काँटों और बारिश के बीच 4 घंटे पड़ी रही नवजात, चरवाहे ने सुनी रोने की आवाज़ और बचाई जान
(फोटो: IANS)

मध्य प्रदेश के रायसेन ज़िले से एक दिल को छू लेने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक चरवाहे की सजगता ने एक नवजात बच्ची की जान बचा ली। मंगलवार को यह बच्ची एक घने जंगली इलाके में कंटीली झाड़ियों के बीच लावारिस हालत में मिली थी। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टरों का अनुमान है कि जन्म के तुरंत बाद छोड़ दी गई यह बच्ची, बचाए जाने से पहले लगभग चार घंटों तक बारिश के पानी और कीड़ों के बीच अकेली पड़ी रही।

मामला बम्हौरी तहसील के डुंगरिया खुर्द गाँव का है। एक चरवाहा अपने मवेशी चरा रहा था, तभी उसे किसी बच्चे के रोने की आवाज़ सुनाई दी। आवाज़ की दिशा में जाने पर उसने देखा कि काँटों भरी झाड़ियों में पानी के बीच एक नवजात बच्ची पड़ी है। उसने तुरंत इसकी सूचना आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को दी, जिसके बाद पुलिस और स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुँचे।

अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में

बच्ची को बचाने के बाद उसे पहले बम्हौरी के उप-स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहाँ से उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे सिलवानी और फिर रायसेन ज़िला अस्पताल रेफर कर दिया गया। रायसेन में उसे सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) में भर्ती कराया गया है, जहाँ डॉक्टरों की एक टीम उसकी सेहत पर लगातार नज़र बनाए हुए है।

SNCU के इंचार्ज डॉ. आलोक राय ने बताया, "कंटीली झाड़ियों की वजह से बच्ची के शरीर पर चोट के निशान थे। बारिश के पानी में रहने से उसका शरीर अकड़ गया था। जब उसे यहाँ लाया गया, तो वह बहुत कमज़ोर और भूखी थी।" डॉक्टरों का मानना है कि बच्ची का जन्म सुबह करीब 5 बजे हुआ होगा और उसके कुछ ही देर बाद उसे जंगल में छोड़ दिया गया।

पुलिस ने शुरू की माता-पिता की तलाश

बम्हौरी पुलिस स्टेशन के इंचार्ज प्रीतम सिंह राजपूत ने इस घटना को बेहद खतरनाक बताया, क्योंकि जिस जगह बच्ची मिली, वह जंगली जानवरों वाला घना इलाका है। उन्होंने कहा, "ऐसे जंगल में नवजात को छोड़ना जानलेवा साबित हो सकता था।" पुलिस ने इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और बच्ची के माता-पिता का पता लगाने के लिए आसपास के गाँवों में पूछताछ कर रही है।

इस बीच, बाल कल्याण समिति की सदस्य ममता पटेल ने भी अस्पताल जाकर बच्ची का हाल जाना और उसके इलाज की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि समिति ने लावारिस मिली बच्ची के संबंध में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है और वह अगले कुछ दिनों तक डॉक्टरों की देखरेख में ही रहेगी।

इनपुट: IANS

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