मंगलवार, 15 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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'शोले' के निर्माता जी.पी. सिप्पी का असली सरनेम कुछ और था, जानिए कैसे बदला नाम

हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी हिट 'शोले' के निर्माता के तौर पर जी.पी. सिप्पी का नाम हर कोई जानता है, लेकिन कम ही लोगों को पता है कि जिस 'सिप्पी' सरनेम से उन्हें शोहरत मिली, वह उनका असली पारिवारिक नाम था…

'शोले' के निर्माता जी.पी. सिप्पी का असली सरनेम कुछ और था, जानिए कैसे बदला नाम
(फोटो: IANS)

हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी हिट 'शोले' के निर्माता के तौर पर जी.पी. सिप्पी का नाम हर कोई जानता है, लेकिन कम ही लोगों को पता है कि जिस 'सिप्पी' सरनेम से उन्हें शोहरत मिली, वह उनका असली पारिवारिक नाम था ही नहीं। उनका पूरा और असली नाम गोपालदास परमानंद सिपाहिमलानी था।

समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, जी.पी. सिप्पी का जन्म 14 सितंबर 1914 को ब्रिटिश भारत के हैदराबाद (सिंध) में एक अमीर कारोबारी परिवार में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। उनका परिवार अंग्रेजों और अन्य यूरोपीय लोगों के साथ व्यापार करता था, जिन्हें 'सिपाहिमलानी' जैसा लंबा नाम बोलने में मुश्किल होती थी। सुविधा के लिए वे इसे छोटा करके 'सिप्पी' कहने लगे और धीरे-धीरे यही नाम उनकी पारिवारिक पहचान बन गया।

कानून और कंस्ट्रक्शन से फिल्मों तक का सफर

फिल्मों में कदम रखने से पहले जी.पी. सिप्पी एक वकील थे और कराची में अपना कारोबार भी संभालते थे। 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद उनका परिवार सिंध छोड़कर मुंबई आ गया। यहाँ उन्होंने नए सिरे से शुरुआत करते हुए प्रॉपर्टी और कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में काम किया। मुंबई के कोलाबा और चर्चगेट जैसे पॉश इलाकों में उन्होंने कई इमारतें बनाईं और बेचीं।

फिल्मों में उनकी एंट्री भी कंस्ट्रक्शन के काम के जरिए ही हुई। मरीन लाइंस में एक प्रोजेक्ट के निर्माण अधिकार बेचकर मिले पैसों से उन्होंने अपनी पहली फिल्म 'सजा' (1951) बनाई, जिसमें देव आनंद और निम्मी ने अभिनय किया था।

एक शानदार फिल्मी विरासत

बतौर निर्माता उनकी सबसे यादगार फिल्म 1975 में आई 'शोले' थी, जिसका निर्देशन उनके बेटे रमेश सिप्पी ने किया था। लेकिन उनका करियर इससे कहीं ज़्यादा बड़ा था। उन्होंने 'ब्रह्मचारी', 'अंदाज़', और 'सीता और गीता' (1972) जैसी कई सफल फिल्मों का निर्माण किया। बाद में भी उन्होंने 'शान', 'सागर', 'राजू बन गया जेंटलमैन' और 'पत्थर के फूल' जैसी फिल्में बनाईं।

सिप्पी सिर्फ निर्माता ही नहीं, बल्कि एक निर्देशक भी थे। उन्होंने 'मरीन ड्राइव', 'मिस्टर इंडिया' और 'श्रीमती 420' जैसी कुछ फिल्मों का निर्देशन भी किया। फिल्मों के अलावा, वह फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और फिल्म एंड टीवी प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के चेयरमैन भी रहे। अपने योगदान के लिए उन्हें 1968 और 1982 में फिल्मफेयर पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। 25 दिसंबर 2007 को 93 साल की उम्र में उनका निधन हो गया।

इनपुट: IANS

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