मंगलवार, 15 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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सेंसर बोर्ड ने फिल्म 'सहिया' पर लगाया नक्सलवाद का आरोप, निर्माता ने कहा- 'कोर्ट जाऊँगा'

फिल्म 'सहिया' के निर्माता संजय शर्मा अपनी फिल्म को सेंसर सर्टिफिकेट दिलाने के लिए मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। शर्मा के अनुसार, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने उनकी फिल्म पर नक्सलवाद को…

सेंसर बोर्ड ने फिल्म 'सहिया' पर लगाया नक्सलवाद का आरोप, निर्माता ने कहा- 'कोर्ट जाऊँगा'
(फोटो: IANS)

फिल्म 'सहिया' के निर्माता संजय शर्मा अपनी फिल्म को सेंसर सर्टिफिकेट दिलाने के लिए मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। शर्मा के अनुसार, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने उनकी फिल्म पर नक्सलवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाकर उसे पास करने में अड़चनें पैदा कर दी हैं, जबकि फिल्म की कहानी हिंसा के खिलाफ और प्यार के पक्ष में है। समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में उन्होंने कहा कि अगर रिव्यू कमेटी से भी फिल्म पास नहीं होती है, तो वे अदालत का दरवाज़ा खटखटाएँगे।

शर्मा ने इस आरोप को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा, “'सहिया' असल में एक खूबसूरत लव स्टोरी है, जो नक्सलवाद और पुलिस के संघर्ष के बीच फंसे एक आदिवासी के प्यार की कहानी दिखाती है।“ उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि फिल्म का मकसद नक्सलवाद का समर्थन करना नहीं, बल्कि यह दिखाना है कि बंदूक और हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकते।

शूटिंग की जगह बनी मुश्किल?

फिल्म की शूटिंग छत्तीसगढ़ के असली जंगलों और आदिवासी इलाकों में की गई है ताकि कहानी बनावटी न लगे। संजय शर्मा को लगता है कि यही वास्तविक लोकेशन अब फिल्म के लिए परेशानी का सबब बन गई है। उन्होंने IANS को बताया कि सेंसर बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उनसे कहा कि अगर फिल्म की शूटिंग उत्तर प्रदेश में हुई होती, तो उसे अब तक सर्टिफिकेट मिल गया होता। शर्मा ने इस पर हैरानी जताते हुए कहा, “यह सोचने वाली बात है कि सिर्फ शूटिंग की जगह बदल जाने से फिल्म का मतलब कैसे बदल सकता है?”

प्रक्रिया में देरी और पारदर्शिता पर सवाल

निर्माता ने सेंसर बोर्ड की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और देरी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “मेरी फिल्म को रिव्यू कमिटी के सामने पांच दिनों के भीतर दिखाया जाना था, लेकिन इसमें करीब 21 दिन लग गए।” उन्होंने यह भी बताया कि बोर्ड यह स्पष्ट नहीं कर पा रहा है कि फिल्म का कौन-सा सीन नक्सलवाद से प्रेरित है। उनके मुताबिक, ऐसा लगता है कि बोर्ड ने पहले से ही फिल्म को अनुमति न देने का मन बना लिया था।

संजय शर्मा ने कहा कि उनकी फिल्म एक आम और गरीब आदमी के नज़रिए को दिखाती है, जो सिस्टम, नक्सलियों और पुलिस के संघर्ष के बीच खुद को फंसा हुआ पाता है। अब उनकी नज़रें रिव्यू कमेटी के फ़ैसले पर टिकी हैं और अगर वहां से भी निराशा हाथ लगी, तो वे कोर्ट जाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्हें भरोसा है कि अदालत फिल्म के कंटेंट को समझेगी और उसे पास करेगी।

इनपुट: IANS

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