रविवार, 30 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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वर्ल्ड यूथ ब्रिज चैंपियनशिप: वीजा की अड़चन और आखिरी पलों में बदलाव के बावजूद भारत ने जीता कांस्य

चीन में आयोजित 9वीं वर्ल्ड यूथ ट्रांसनेशनल ब्रिज चैंपियनशिप में भारत की अंडर-31 टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, वीजा में देरी और टीम संयोजन…

वर्ल्ड यूथ ब्रिज चैंपियनशिप: वीजा की अड़चन और आखिरी पलों में बदलाव के बावजूद भारत ने जीता कांस्य
(फोटो: IANS)

चीन में आयोजित 9वीं वर्ल्ड यूथ ट्रांसनेशनल ब्रिज चैंपियनशिप में भारत की अंडर-31 टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, वीजा में देरी और टीम संयोजन में आखिरी समय में हुए बदलावों जैसी कई चुनौतियों के बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की।

चीन के हेफेई शहर में हुई इस प्रतियोगिता के फाइनल में भारतीय टीम ने 82.34 विक्ट्री पॉइंट्स (VP) के साथ तीसरा स्थान पक्का किया। इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक चीन की एगोफैन्स टीम (89.96 VP) ने जीता, जबकि चीन की ही अंडर-31 टीम (89.47 VP) को रजत पदक मिला।

टीम की दृढ़ता और चुनौतियों पर जीत

भारतीय टीम के लिए यह सफर आसान नहीं था। कुछ खिलाड़ियों को समय पर चीनी वीजा नहीं मिल सका, जिसके कारण टीम के कोच और कप्तान कौस्तुभ बेंद्रे को खेलने वाले संयोजन में तत्काल बदलाव करने पड़े। अंशुल भट्ट, जिन्होंने शुभम आचार्य के साथ काफी अभ्यास किया था, उन्हें कोलकाता के सायनतन कुशारी के साथ जोड़ी बनानी पड़ी।

वहीं, शुभम ने मध्य प्रदेश के रायबिदपुरा गांव की विद्या पटेल के साथ जोड़ी बनाई। यह गांव ब्रिज खिलाड़ियों के लिए मशहूर है। इन नई जोड़ियों ने टीम को तब तक संभाले रखा, जब तक कोलकाता से साग्निक रॉय और सुरजीत बार टीम के साथ जुड़ नहीं गए। इन विपरीत परिस्थितियों के चलते, अंशुल और विद्या को भारत के आठ में से छह क्वालिफाइंग राउंड खेलने पड़े।

फाइनल तक का सफर

3 से 4 अगस्त तक चले क्वालिफाइंग राउंड में भारतीय टीम सातवें स्थान पर रही थी, जिससे उसने आठ टीमों के फाइनल के लिए क्वालिफाई किया। 5 अगस्त को फाइनल राउंड रॉबिन फॉर्मेट में खेला गया, जिसमें हर टीम ने बाकी सात टीमों के साथ सात-बोर्ड का मैच खेला।

कोच कौस्तुभ बेंद्रे ने 17 वर्षीय अंशुल भट्ट को बड़े आयु वर्ग में चुनने के फैसले पर कहा, "अंशुल को उनकी जगह बनाने की वजह से चुना गया है, न कि उनकी उम्र या शोहरत के कारण। वह इस उम्र में भी अंडर-31 स्तर के लिए जरूरी अनुशासन, संयम और साझेदारी की समझ दिखाते हैं।"

इनपुट: IANS

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News4Social स्पोर्ट्स डेस्क

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