शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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मिलिए 17 साल के रेहान से, जो सैकड़ों भारतीय महिलाओं को सिखा रहे हैं पैसों का सही इस्तेमाल

दुबई में पढ़ने वाले 17 वर्षीय छात्र रेहान चौधरी ने एक ऐसी पहल की है, जो भारत की सैकड़ों महिलाओं को आर्थिक रूप से साक्षर और आत्मनिर्भर बना रही है। 'द प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट' नाम के उनके अभियान के तह…

मिलिए 17 साल के रेहान से, जो सैकड़ों भारतीय महिलाओं को सिखा रहे हैं पैसों का सही इस्तेमाल
(फोटो: IANS)

दुबई में पढ़ने वाले 17 वर्षीय छात्र रेहान चौधरी ने एक ऐसी पहल की है, जो भारत की सैकड़ों महिलाओं को आर्थिक रूप से साक्षर और आत्मनिर्भर बना रही है। 'द प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट' नाम के उनके अभियान के तहत अब तक पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की 420 महिलाओं को वित्तीय प्रबंधन के गुर सिखाए जा चुके हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस मुहिम की प्रेरणा उन्हें अपनी देखभाल करने वाली शंपा से मिली, जब उन्हें पता चला कि शंपा का परिवार एक वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार हो गया था।

इसी घटना ने रेहान को सोचने पर मजबूर किया कि सही जानकारी और जागरूकता से लोगों को उनकी मेहनत की कमाई सुरक्षित रखने में कैसे मदद की जा सकती है। इसी सोच के साथ उन्होंने 'नोइंग योर मनी' नाम का एक विशेष पाठ्यक्रम तैयार किया। 10 मॉड्यूल वाली यह पाठ्यपुस्तक आसान भाषा और रोजमर्रा के उदाहरणों के जरिए बजट बनाने, बचत, कर्ज, निवेश और डिजिटल धोखाधड़ी पहचानने जैसे जरूरी विषय समझाती है।

प्रोजेक्ट का मकसद और तरीका

रेहान चौधरी कहते हैं, “मैं वित्तीय शिक्षा को व्यावहारिक बनाना चाहता था, जो लोगों के रोजमर्रा के फैसलों में काम आए। यह सिर्फ यह जानना नहीं है कि पैसा कैसे काम करता है, बल्कि सही सवाल पूछने, जोखिमों को समझने और सोच-समझकर फैसले लेने में सक्षम होने के बारे में भी है।”

उनकी कार्यशालाओं में घरेलू खर्चों का हिसाब रखने, वेतन समझने, अलग-अलग कर्ज की शर्तों की तुलना करने और बैंकिंग जानकारी को सुरक्षित रखने जैसे विषयों पर जोर दिया जाता है।

पश्चिम बंगाल से महाराष्ट्र तक विस्तार

इस पहल की शुरुआत पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में बंधन-कोन्नगर और बंधन बैंक के सहयोग से हुई। इसके बाद आसनसोल में बंगाल सृष्टि इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट लिमिटेड और फीड के माध्यम से इसका विस्तार हुआ। यह कार्यक्रम महाराष्ट्र के कोल्हापुर तक भी पहुंचा, जहां इंडो काउंट कार्यस्थल पर आयोजित कार्यशाला में 200 महिला कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। आंकड़ों के मुताबिक, इन अलग-अलग सहयोगों के माध्यम से प्रोजेक्ट कुल 420 महिलाओं तक सीधे पहुंचा है।

ज्ञान को स्थायी बनाने का मॉडल

इस प्रोजेक्ट का एक अहम हिस्सा 'कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन' (CRP) मॉडल है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सीखने की प्रक्रिया कार्यशालाओं के बाद भी जारी रहे। रेहान ने 40 सीआरपी को प्रशिक्षित किया है, जो अब इस ज्ञान को अपने समुदायों में आगे बढ़ा रहे हैं। प्रतिभागियों और प्रशिक्षकों की मदद के लिए शिक्षण वीडियो, कई भाषाओं में अध्ययन सामग्री और एक वेबसाइट भी बनाई गई है। कार्यशालाएं हिंदी और अंग्रेजी में होती हैं, लेकिन स्थानीय टीमों की मदद से मराठी जैसी क्षेत्रीय भाषाओं में भी अनुवाद उपलब्ध कराया जाता है।

इनपुट: IANS

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