मंगलवार, 15 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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एक सरकारी योजना और इज़राइल की तकनीक, गिरिडीह के सुमन ने मछली पालन से लिखी सफलता की कहानी

झारखंड के गिरिडीह में एक युवा उद्यमी ने आधुनिक तकनीक और सरकारी मदद के संगम से सफलता की मिसाल पेश की है। इज़राइल से फिशरीज़ और एग्रीकल्चर की पढ़ाई करके लौटे सुमन कुमार आज प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा…

एक सरकारी योजना और इज़राइल की तकनीक, गिरिडीह के सुमन ने मछली पालन से लिखी सफलता की कहानी
(फोटो: IANS)

झारखंड के गिरिडीह में एक युवा उद्यमी ने आधुनिक तकनीक और सरकारी मदद के संगम से सफलता की मिसाल पेश की है। इज़राइल से फिशरीज़ और एग्रीकल्चर की पढ़ाई करके लौटे सुमन कुमार आज प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) का लाभ उठाकर अपने गांव में ही एक सफल कारोबार चला रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, उनके इस प्रयास से न सिर्फ उन्हें अच्छा मुनाफा हो रहा है, बल्कि 30 से 40 स्थानीय लोगों को सीधा रोजगार भी मिला है।

सुमन ने अपने मत्स्य पालन कारोबार की शुरुआत महज आठ तालाबों से की थी, जिनसे पहले साल करीब 45 से 50 टन मछली का उत्पादन हुआ। वैज्ञानिक प्रबंधन और लगातार मेहनत के दम पर आज उनका काम 32 तालाबों तक फैल चुका है, जिनसे सालाना 100 से 150 टन मछली का उत्पादन होता है।

मुनाफे और रोजगार का केंद्र

सुमन के तालाबों में मुख्य रूप से रोहू और कतला जैसी प्रजातियों की मछलियां पाली जाती हैं। इन मछलियों की आपूर्ति गिरिडीह के स्थानीय बाजार के अलावा झारखंड के अन्य जिलों और बिहार की मंडियों तक होती है। सुमन ने बताया कि अलग-अलग प्रजाति की मछलियों का भाव अलग होता है, लेकिन रोहू और कतला का थोक भाव 180 से 200 रुपए प्रति किलोग्राम तक मिल जाता है। उन्होंने यह भी साझा किया कि वैज्ञानिक तरीके से यह काम करने पर 50 से 60 प्रतिशत तक मुनाफा संभव है।

सरकारी योजना बनी मददगार

इस सफलता में सरकारी योजना की अहम भूमिका रही। सुमन ने IANS से बातचीत में बताया, "पीएमएमएसवाई योजना का लाभ लेने के लिए मत्स्य विभाग जिला कार्यालय में आवेदन किया। आवेदन के बाद खासकर हेचरी निर्माण के लिए योजना का लाभ मिला। आज मुझे और स्थानीय किसानों को फायदा हो रहा है।" उन्होंने कहा कि यह योजना उनके लिए बहुत लाभदायक साबित हुई और स्थानीय मत्स्य अधिकारियों ने भी काफी मदद की।

इनपुट: IANS

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